हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार ,जम्मू कश्मीर अंजुमन-ए-शरई शियाने के तत्वावधान में यौम-ए-अरबईन-ए-हुसैनी (अ.स.) के अवसर पर कश्मीर घाटी के विभिन्न क्षेत्रों में विशेष धार्मिक कार्यक्रम, मजलिस-ए-अज़ा तथा जुलूस-ए-अज़ा और ज़ुलजनाह पूरे श्रद्धा और सम्मान के साथ निकल गए।
इन मजलिसों और जुलूसों में हजारों अज़ादारों ने भाग लेकर हज़रत इमाम हुसैन (अ.) और शहीदाने-कर्बला को श्रद्धांजलि अर्पित की।अरबईन के मुख्य आयोजन केंद्रीय इमामबाड़ा बडगाम तथा ज़ीलदार मोहल्ला, सईदा कदल में हुए, जहाँ उलेमा ने अरबईन के दर्शन और कर्बला के संदेश के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला।
बडगाम के केंद्रीय इमामबाड़े में आयोजित विशाल मजलिस को संबोधित करते हुए जम्मू-कश्मीर अंजुमन-ए-शरई शियान के अध्यक्ष आगा सैयद हसन मौसवी सफ़वी ने कहा कि अरबईन ईमान, वफ़ादारी और हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) के सार्वभौमिक मिशन के प्रति नवीनीकृत संकल्प का शाश्वत प्रतीक है।
उन्होंने क़ुरआन की आयत-ए-मवद्दत का उल्लेख करते हुए कहा कि अहले बैत (अ.) से प्रेम और क़ुरआन से मज़बूत संबंध ही वास्तविक इस्लामी मार्गदर्शन, नैतिक पवित्रता और मुक्ति की गारंटी है।
उन्होंने कहा कि हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) की महान कुर्बानी ने इस्लाम की वास्तविक भावना—न्याय, स्वतंत्रता, मानवीय गरिमा और अत्याचार के विरुद्ध प्रतिरोध—को हमेशा के लिए सुरक्षित कर दिया। उन्होंने कहा कि अरबईन के अवसर पर दुनिया भर से करोड़ों अहले बैत (अ.) के चाहने वालों का कर्बला पहुँचना इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि कर्बला का आंदोलन सदियों के दमन और अत्याचार के बावजूद आज भी पूरी शक्ति के साथ जीवित है।
आगा सैयद हसन मौसवी ने मोमिनों से आह्वान किया कि वे इमाम हुसैन (अ.) से अपने संबंध को तक़वा, इबादत, न्याय, उत्तम चरित्र और इस्लामी मूल्यों के व्यावहारिक पालन के माध्यम से अपने जीवन में प्रदर्शित करें। उन्होंने कहा कि कर्बला का संदेश मुस्लिम उम्मत के लिए आध्यात्मिक जागृति, सामाजिक न्याय, एकता और सत्य पर दृढ़ रहने का स्थायी स्रोत है।
मजलिस के अंत में इस्लामी जगत की एकता, विश्व शांति, मुस्लिम उम्मत की भलाई, अरबईन की मजलिसों और अज़ादारी की स्वीकार्यता तथा हज़रत इमाम मेंहदी (अ.ज.) के शीघ्र ज़ुहूर के लिए विशेष दुआएँ की गईं।
इसके बाद आस्ताना शरीफ़ बडगाम से केंद्रीय इमामबाड़ा बडगाम तक ज़ुलजनाह का जुलूस अत्यंत श्रद्धा, अनुशासन और धार्मिक सम्मान के साथ निकाला गया, जिसमें बड़ी संख्या में अज़ादार शामिल हुए।
इस बीच ज़ीलदार मोहल्ला, सईदा कदल श्रीनगर में आयोजित मजलिस को संबोधित करते हुए हुज्जतुल इस्लाम सैयद मुजतबा अब्बास मौसवी सफ़वी ने कहा कि अरबईन हुसैनी (अ.) नबियों के ईश्वरीय संदेश और इमाम हुसैन (अ.) के शाश्वत संदेश की निरंतरता है।
उन्होंने कहा कि क़ुरआन, हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा (स.ल.), अहले बैत (अ.) की शिक्षाओं तथा विलायत और इमामत के सिद्धांतों से जुड़ाव ही मानवता को गुमराही और भ्रष्टाचार से सुरक्षित रख सकता है।
उन्होंने कर्बला की घटना को सत्य, न्याय और अत्याचार के विरुद्ध स्थायी प्रतिरोध का प्रतीक बताते हुए मोमिनों से आग्रह किया कि वे ज़ियारत-ए-इमाम हुसैन (अ.), अज़ादारी, नेक आचरण और मानव सेवा के माध्यम से अपने हुसैनी संबंध को और मजबूत करें।
उन्होंने ज़ायरों और अज़ादारों की इबादतों की स्वीकार्यता तथा हज़रत इमाम मेंहदी (अ.ज.) के शीघ्र ज़ुहूर के लिए भी विशेष दुआ की।मजलिस के समापन के बाद ज़ीलदार मोहल्ला, सईदा कदल से कदीमी इमामबाड़ा हसनाबाद श्रीनगर तक ज़ुलजनाह का जुलूस निकाला गया, जिसमें हजारों अज़ादारों ने भाग लेकर इमाम हुसैन (अ.) और शहीदाने-कर्बला की महान कुर्बानियों को श्रद्धांजलि अर्पित की।सभी जुलूस अपने निर्धारित मार्गों से शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुए।
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